Wednesday, March 4, 2026
Uttarakhand

सीएम की मॉडल जिला परिकल्पना को मिली रफ्तार, 20 गांवों की 10 हजार आबादी को मिलेगा सीधा लाभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मॉडल जिला परिकल्पना अब जमीन पर आकार लेती नजर आ रही है। “सरकार जनता के द्वारा” कार्यक्रम के तहत जनपद के विभिन्न गांवों में लगाए गए शिविरों का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। इन्हीं जनभावनाओं और स्थानीय मांगों का परिणाम है कि लोहाघाट ब्लॉक की सीमांत 20 किलोमीटर लंबी किमतोली–रैसाल मोटर मार्ग को हाटमिक्स से पक्का एवं सुधारीकरण के लिए 12.10 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है।

यह सड़क लगभग 20 गांवों को जोड़ती है, जिससे करीब 10 हजार की आबादी सीधे तौर पर लाभान्वित होगी। वर्षों से जर्जर हालत में पड़ी इस सड़क के कारण ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। बरसात में हालात और भी बदतर हो जाते थे। अब डामरीकरण से आवागमन सुगम होगा और सीमांत क्षेत्र को विकास की नई राह मिलेगी। दरअसल, जिलाधिकारी मनीष कुमार के नेतृत्व में आयोजित बहुउद्देश्यीय जनसेवा शिविरों मेंस्थानीय समस्याओं का मौके पर त्वरित समाधान किया गया।

वहीं सड़क, स्कूल, बिजली और पेयजल जैसी बड़ी योजनाओं से जुड़ी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए शासन स्तर पर पत्राचार किया गया। लगातार फॉलोअप और प्रभावी पैरवी का नतीजा है कि अब बड़ी योजनाओं पर भी ठोस निर्णय सामने आने लगे हैं। “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान के दौरान ग्रामीणों ने किमतोली–रैसाल सड़क के डामरीकरण की मांग प्रमुखता से उठाई थी। जिला प्रशासन ने प्रस्ताव शासन को भेजा, जिस पर शीघ्र निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री ने वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी। इससे यह संदेश भी गया है कि शिविरों में उठी समस्याएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि उन पर कार्रवाई भी होती है।

लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता हितेश कांडपाल ने बताया कि स्वीकृति प्राप्त होते ही विभाग द्वारा तकनीकी औपचारिकताएं पूरी कर निविदा प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। निर्माण कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कराया जाएगा और समयसीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। क्षेत्रवासियों ने इसे होली पर मिली बड़ी सौगात बताते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और जिला प्रशासन का आभार जताया है। उनका कहना है कि शिविरों की पहल और शासन की तत्परता से अब सीमांत गांवों में विकास की किरण साफ दिखाई देने लगी।



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