हिमालय की बलि देकर अरावली का बचाव नहीं — 130 पर्यावरण बटालियन का विस्थापन हरगिज़ स्वीकार नहीं!
सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में 130 पर्यावरण बटालियन के विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिक संगठन का धरना आज भी पूरे जोश, संकल्प और जनसमर्थन के साथ जारी रहा। “हिमालय की बलि देकर अरावली का बचाव उचित नहीं” की तर्ज पर यह आंदोलन अब जनपद के अस्तित्व, भविष्य और पर्यावरण की रक्षा का जनआंदोलन बन चुका है।
आज जनपद पहुंचे सांसद अजय टमटा जी को पूर्व सैनिक संगठन द्वारा ज्ञापन सौंपते हुए केंद्र सरकार के इस निर्णय को तत्काल निरस्त करने की मांग की गई। सांसद महोदय ने आश्वस्त किया कि आगामी 8 मार्च से प्रारंभ होने वाले संसद सत्र में इस विषय को प्रमुखता से उठाया जाएगा तथा सार्थक कार्रवाई का प्रयास किया जाएगा। साथ ही उन्होंने पूर्व सैनिकों से सकारात्मक निर्णय आने तक आंदोलन स्थगित करने का आग्रह भी किया, जिसे संगठन ने सिरे से अस्वीकार कर दिया।
पूर्व सैनिकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“यह किसी एक बटालियन की नहीं, बल्कि सीमांत जनपद के भविष्य, युवाओं के रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और हिमालय के अस्तित्व की लड़ाई है। जब तक ठोस और लिखित निर्णय नहीं आता, यह धरना अनवरत जारी रहेगा। किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं होगा।” धरने को आज बार एसोसिएशन द्वारा अध्यक्ष श्री मोहन भट्ट जी के नेतृत्व में नैतिक समर्थन दिया गया। उन्होंने कहा कि जो आवाज जनप्रतिनिधियों को विधानसभा और संसद में बुलंद करनी चाहिए थी, उसे आज पूर्व सैनिक सड़कों पर उठा रहे हैं।
यह संघर्ष निस्वार्थ भाव से जनपद के भविष्य के लिए लड़ा जा रहा है, इसलिए प्रत्येक जनपदवासी का नैतिक दायित्व है कि वह इस आंदोलन के साथ खड़ा हो। एक ओर जहां लोग होली के रंगों में सराबोर हैं, वहीं पूर्व सैनिक अपने सीमांत जनपद के भविष्य की चिंता में उत्सवों का त्याग कर अस्तित्व की यह लड़ाई लड़ रहे हैं। यह समय तमाशबीन बने रहने का नहीं, बल्कि इतिहास में अपनी भूमिका तय करने का है। यदि आज हम मौन रहे, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें कभी क्षमा नहीं करेंगी।
धरना स्थल पर यह भी घोषणा की गई कि आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। जनपद के प्रत्येक गांव, प्रत्येक संगठन और प्रत्येक युवा तक पहुंचकर इसे जनांदोलन का रूप दिया जाएगा। “जनपद पिथौरागढ़ की एक आवाज” बनकर इस निर्णय को वापस कराने तक संघर्ष जारी रहेगा।आज के धरने में बार एसोसिएशन के सचिव पंकज शर्मा जी,पूर्व सचिव अजय बोहरा जी,कोषाध्यक्ष सीमित पैंट जी सहित देवलथल क्षेत्र से आए 86 वर्षीय वयोवृद्ध पूर्व सैनिक खुशाल सिंह बसेड़ा की गरिमामयी उपस्थिति ने आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की।
उनके संकल्प ने यह संदेश दिया कि यह संघर्ष पीढ़ियों का संघर्ष है—अस्तित्व, सम्मान और भविष्य की रक्षा का संघर्ष।आज धरने को समर्थन देने हेतु पूर्व सैनिक संगठन के कप्तान रमेश चंद,रामदत्त पाठक, मोहन राम, नारायण सिंह, भगवान सिंह रौतेला “सेना मेडल”, केदार सिंह,दिलीप सिंह भंडारी,विक्रम चंद सहित दर्जनों पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।
स्पष्ट चेतावनी:
यदि सरकार ने जनभावनाओं की अनदेखी की, तो यह आंदोलन सड़कों से लेकर संसद तक और अधिक प्रखर रूप में उठेगा। सीमांत की आवाज अब दबने वाली नहीं है।
हिमालय बचेगा — सीमांत बचेगा — पिथौरागढ़ बचेगा!
130 पर्यावरण बटालियन का विस्थापन हर हाल में रोका जाएगा!

