Tuesday, January 20, 2026
Uttarakhand

परमार्थ निकेतन में मेदांता, गुरुग्राम के प्रसिद्ध चिकित्सकों के कुशल मार्गदर्शन में दो दिवसीय चिकित्सा शिविर आयोजित किया गया

परमार्थ निकेतन ने सेवा, करुणा और समर्पण की जीवंत मिसाल प्रस्तुत करते हुए मेदांता गुड़गांव के विख्यात चिकित्सकों के मार्गदर्शन में दो दिवसीय मल्टीस्पेशलिस्ट चिकित्सा शिविर का भव्य आयोजन किया गया। प्रथम दिन बुखण्डी, विध्यवासिनी मन्दिर और दूसरे दिन स्वामी शुकदेवानन्द चेरिटेबल हास्पिटल में मल्टीस्पेशलिस्ट कैम्प का आयोजन किया गया। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के आशीर्वाद से पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क, गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं समय-समय पर उपलब्ध करायी जा रही है।

परमार्थ निकेतन में सोमवार से शनिवार तक मेदांता गुड़गांव की ओपीडी नियमित रूप से संचालित की जा रही है, जिससे स्थानीय नागरिकों एवं तीर्थयात्रियों को उच्च गुणवत्ता की चिकित्सा सेवाएं सुलभ रूप से प्राप्त हो रही हैं। डॉ. विवेक सभरवाल, एमबीबीएस, डीएनबी, पीजीडीसीईडी (यूके) कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसीन एवं मधुमेह रोग विशेषज्ञ अपनी सेवायें प्रदान कर रहे हैं।

शिविर में हृदय रोग विशेषज्ञ, जनरल फिजिशियन एवं अन्य अनुभवी चिकित्सकों द्वारा बीएमडी, ईसीजी, पीएफटी, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर जैसी महत्वपूर्ण जांचें निःशुल्क की गईं। साथ ही मरीजों को आवश्यक दवाइयां भी पूर्णतः निःशुल्क प्रदान की गईं। इस शिविर से सैकड़ों लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिला, जिनमें बुजुर्ग, महिलाएं, युवा एवं ग्रामीण क्षेत्र के निवासी प्रमुख रूप से शामिल रहे।

शिविर के उद्घाटन अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने मेदांता गुड़गांव के चेयरमैन डॉ. नरेश त्रेहन एवं उनकी पूरी टीम का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा,
“पर्वतीय क्षेत्रों में आज भी बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की अत्यंत आवश्यकता है। जब तक स्वास्थ्य सुरक्षित नहीं होगा, तब तक जीवन भी संतुलित नहीं रह सकता। मेदांता जैसी विश्वसनीय संस्था का परमार्थ निकेतन के साथ जुड़कर सेवा के इस यज्ञ में सहभागी बनना वास्तव में मानवता के लिए वरदान है।”

स्वामी जी ने कहा कि चिकित्सा शिविर करुणा, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि पहाड़ों का जीवन कठिन है, जहां आज भी अनेक लोग आधुनिक चिकित्सा से वंचित हैं। ऐसे में इस प्रकार के शिविर पहाड़ी समाज के लिए संजीवनी का कार्य करते हैं।

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