सड़क पर ‘थार’ से गुंडागर्दी करने वाले रईसजादे को कोर्ट का तमाचा, जमानत याचिका खारिज; जेल में ही कटेगी रातें
अदालत तल्ख: रसूखदार बाप ने 20 साल के बेटे को हुड़दंग के लिए दी थी थार, बाहर आया तो गवाहों को धमकाएगा!
कैंपस बस के ड्राइवर को थार के नीचे घसीटने वाले देव चौधरी पर कोर्ट सख्त, कहा- ‘यह सीधे-सीधे हत्या का प्रयास’
ऋषिकेश। जौलीग्रांट स्थित स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय की बस के चालक गुरमुख सिंह पर जानबूझकर थार गाड़ी चढ़ाकर उन्हें दूर तक घसीटने के सनसनीखेज मामले में कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ऋषिकेश (देहरादून) के माननीय न्यायाधीश कंवर अमनिन्दर सिंह ने मामले की गंभीरता और पुख्ता इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को देखते हुए आरोपी देव चौधरी की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि इस बात की पूरी आशंका है कि जेल से बाहर आने के बाद आरोपी गवाहों को डरा-धमका सकता है।
रोड रेज नहीं, सीधे हत्या का प्रयास था:
कोर्टअदालत के समक्ष आरोपी के वकील ने दलील दी थी कि भीड़ से घबराकर २० वर्षीय युवक ने अचानक गाड़ी आगे बढ़ा दी थी, उसकी कोई जानलेवा मंशा नहीं थी। इस पर राज्य की ओर से एडीजीसी (दाण्डिक) राजेश पैन्यूली और पीड़ित के अधिवक्ता संतोष कुमार ने तीखा विरोध किया। अभियोजन ने कोर्ट को बताया कि आरोपी ने अकारण ही थार गाड़ी को तेजी से काटकर आगे खड़े लोगों पर चढ़ा दिया था। यदि थार आगे खड़ी दूसरी कार से न टकराती, तो चालक गुरमुख सिंह की मौके पर ही मौत हो सकती थी। हादसे में गुरमुख की कई पसलियां टूट गई थीं और उनके सिर में खून का थक्का जम गया था।
छात्रा का वीडियो बना सबसे बड़ा हथियार
इस पूरे खौफनाक घटनाक्रम को विश्वविद्यालय की ही एक बहादुर छात्रा छवि पंत ने अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया था। पुलिस ने इस वीडियो फुटेज को पैन ड्राइव में लेकर कोर्ट के सामने मुख्य साक्ष्य के तौर पर पेश किया। वीडियो में साफ दिख रहा था कि सड़क पर बस चालक और छात्र सिर्फ बात करने का प्रयास कर रहे थे, जबकि थार चालक देव चौधरी अंदर बैठकर आपत्तिजनक इशारे कर रहा था और फिर उसने अचानक गाड़ी रौंदते हुए आगे बढ़ा दी।
प्रभावशाली पिता का बेटा, भागने का भी रहा है रिकॉर्ड अदालत ने अपने आदेश में यह भी रेखांकित किया कि आरोपी देव चौधरी के पिता एक प्रभावशाली व्यापारी हैं, जिन्होंने अपने २० साल के बेटे को हुड़दंग मचाने के लिए थार गाड़ी दे रखी थी। घटना के बाद आरोपी मौके से गाड़ी लेकर भाग गया था और पुलिस की कई टीमों की दबिश के बाद बमुश्किल १९ अगस्त को गिरफ्तार हो सका था। कोर्ट ने माना कि विचारण (ट्रायल) के दौरान आरोपी को उम्रकैद तक की सजा हो सकती है, ऐसे में उसे जमानत देने का कोई औचित्य नहीं बनता।

