Sunday, February 8, 2026
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पत्रकारिता की गरिमा को ताक पर रखकर अपराध का माध्यम बन चुके न्यूज पोर्टलों पर कार्यवाही मांग

देहरादून/हरिद्वार। नेशनलिस्ट यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (एनयूजे उत्तराखण्ड) ने उत्तराखण्ड में कुकुरमुत्ते की तरह उग आए न्यूज पोर्टलों की ओर मुख्यमंत्री, सूचना सचिव और महानिदेशक सूचना का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि राज्य में कुछ तथाकथित न्यूज पोर्टल पत्रकारिता की गरिमा को ताक पर रखकर ‘अपराध का माध्यम’ बन चुके हैं। जिनके द्वारा एक सुनियोजित साजिश के तहत कार्य करते हुए स्पष्ट तौर पर धोखाधड़ी एवं कूटरचना, अवैध वसूली एवं ब्लैकमेलिंग, सामाजिक सौहार्द बिगाड़ना तथा साइबर अपराध जैसे गैर कानूनी कार्य किये जा रहे हैं।

यूनियन की ओर से राज्य के प्रमुख अधिकारियों को भेजे पत्र में कहा गया है कि वर्तमान डिजिटल युग में शासन की योजनाओं और जनहितकारी कार्यों के प्रचार-प्रसार में सोशल मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय है। किंतु, इसी की आड़ में न्यूज पोर्टलों के लिए किसी ठोस मानक, नियमावली और प्रभावी अंकुश का अभाव होने के कारण वर्तमान में न्यूज पोर्टलों की एक अनियंत्रित बाढ़ सी आ गई है। इन तथाकथित पोर्टलों द्वारा पत्रकारिता की गरिमा को ताक पर रखकर मनमाने ढंग से कार्य किया जा रहा है, जो देश और समाजहित में कतई नहीं है।

यूनियन के मार्गदर्शक वरि0 पत्रकार त्रिलोक चन्द्र भट्ट ने सूबे के मुखिया सहित राज्य के सभी जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और जिला सूचना अधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि ऐसे न्यूज पोर्टल बिना किसी ठोस प्रमाण के झूठे, मनगढ़ंत और काल्पनिक आरोप लगाकर सीधे तौर पर सरकार, विभिन्न विभागों, अधिकारियों, समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों, और संस्थाओं का चरित्र हनन कर रहे हैं। इनका एकमात्र उद्देश्य निजी स्वार्थ की पूर्ति हेतु वर्षों से बनी लोगों, संस्थाओं और विभिन्न संस्थानों की सामाजिक प्रतिष्ठा को धूमिल करना और उनकी कार्यप्रणाली पर कीचड़ उछालना है।

श्री भट्ट ने कहा है कि इनके द्वारा भ्रामक खबरें प्रकाशित, प्रसारित और पोस्ट कर दूसरों के प्रति, जनता के बीच नफरत पैदा करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है, जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की प्रबल आशंका बनी रहती है। उन्होंने आरोप लगाया है कि ये पोर्टल झूठे तथ्य और फर्जी आंकड़े प्रस्तुत कर शासन को गुमराह कर रहे हैं ताकि सरकार, शासन प्रशासन, निगम और स्थानीय निकायों से सरकारी विज्ञापन प्राप्त किए जा सकें। यह सीधे तौर पर राजकीय कोष के साथ धोखाधड़ी है।

श्री भट्ट ने पत्र में साफ तौर पर कहा है कि पत्रकारिता के नाम पर विभिन्न संस्थाओं और व्यक्तियों पर दबाव बनाकर उनसे आर्थिक लाभ कमाना और ब्लैकमेल करना तथाकथित पोर्टल संचालकों की कार्यशैली बन चुकी है।

श्री भट्ट ने कहा है कि इंटरनेट पर अवैध प्रचार और साइबर अपराध के माध्यम से ये समाज में अफवाहें फैला रहे हैं इन पोर्टलों की गतिविधियां सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (प्ज् ।बज), 2000 की विभिन्न धाराओं और भारतीय न्याय संहिता (ठछै) की मानहानि एवं जालसाजी संबंधी धाराओं के अंतर्गत एक गंभीर संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आती हैं।

उन्होंने मांग की है कि पत्रकारिता की सुचिता बनाए रखने हेतु न्यूज पोर्टलों के विभागीय पंजीकरण, सूचीबद्धता और उनके संचालन के लिए कठोर मानक व नियम निर्धारित किए जाएं। साथ ही, समाज में विद्वेष फैलाने वाले और ब्लैकमेलिंग में संलिप्त पोर्टलों को चिह्नित कर उनके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि दागी और फर्जी न्यूज पोर्टलों को चिन्हित कर, तत्काल ब्लैकलिस्ट और ब्लॉक किया जाय।

उन्होंने पोर्टलों द्वारा प्रस्तुत किए गए आंकड़ों की जांच कर इनके सरकारी विज्ञापन रोकने और पूर्व में लिए गए विज्ञापनों की वसूली करने की भी मांग उठाई है। उन्होंने यह भी कहा है कि पत्रकारिता के पवित्र पेशे को कलंकित होने से बचाने के लिए साइबर सेल के माध्यम से इनके विरुद्ध थ्प्त् दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए श्री भट्ट ने यह भी मांग की है कि न्यूज पोर्टलों की तथाकथित कारगुजारियों से पीड़ित व्यक्तियों व संस्थाओं की शिकायत दर्ज करने और सुनने के लिए राज्य में एक अधिकार सम्पन्न और सक्षम तंत्र विकसित किया जाय। ताकि डिजिटल मीडिया का उपयोग समाज के निर्माण में हो, न कि विनाश में।

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