Wednesday, May 20, 2026
Uttarakhand

उत्तराखंड ने खोया अपना ईमानदार जननायक »

पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेवानिवृत्त) के निधन से पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई है। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे खंडूरी ने देहरादून स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक, सामाजिक और सैन्य जगत में शोक की लहर फैल गई।

मेजर जनरल खंडूरी अपनी सादगी, ईमानदारी और पारदर्शी प्रशासन के लिए पूरे देश में पहचाने जाते थे। उत्तराखंड की राजनीति में उन्हें सुशासन और साफ छवि वाले नेता के रूप में याद किया जाएगा। भारतीय सेना में सेवा देने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और जनता की सेवा को अपना उद्देश्य बनाया।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के करीबी नेताओं में शामिल रहे खंडूरी ने भाजपा संगठन को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 1999 में सड़क परिवहन मंत्री रहते हुए उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को नई दिशा दी। देश के आधुनिक हाईवे नेटवर्क के विकास में उनके योगदान को आज भी याद किया जाता है।

वर्ष 2007 में उन्होंने पहली बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। अपने कार्यकाल में उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया और विकास योजनाओं को प्राथमिकता दी। राजनीतिक परिस्थितियों के चलते उन्हें पद छोड़ना पड़ा, लेकिन वर्ष 2011 में एक बार फिर उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया।

उनके निधन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़े संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।

उत्तराखंड की राजनीति में मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी का नाम हमेशा एक ईमानदार, कर्मठ और जनसेवा के प्रति समर्पित नेता के रूप में याद किया जाएगा।

ईश्वर पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान तथा शोकाकुल परिजनों को दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।



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