Tuesday, May 12, 2026
Uttarakhand

ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं इंद्रा देवी, 14 वाहिनी मुख्यालय को 555 किलो जीवित मुर्गियों की सफल आपूर्ति

ग्रामोत्थान परियोजना के अंतर्गत महिलाओं को स्वरोजगार एवं आजीविका संवर्धन से जोड़ने हेतु संचालित गतिविधियों के सकारात्मक परिणाम लगातार सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में विकासखंड बिण के अंतर्गत हिमालय CLF से संबंधित मोस्टा बाबा स्वयं सहायता समूह की सदस्य श्रीमती इंद्रा देवी, ग्राम गोगना डाकुड़ा द्वारा पशुपालन विभाग के सहयोग से 14 वाहिनी मुख्यालय जाजरदेवल, पिथौरागढ़ को 555 किलोग्राम जीवित मुर्गियों की सफल आपूर्ति की गई। यह उपलब्धि ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, उद्यमिता एवं सामूहिक सहभागिता का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।

इंद्रा देवी को वर्ष 2025-26 में ग्रामोत्थान परियोजना के अंतर्गत व्यक्तिगत उद्यम “मुर्गी पालन” हेतु 3 लाख रुपये का बिजनेस प्लान स्वीकृत किया गया था। इस योजना के अंतर्गत 1,50,000 रुपये का बैंक ऋण जिला सहकारी बैंक से प्राप्त किया गया, 75,000 रुपये का सहयोग ग्रामोत्थान परियोजना द्वारा तथा 75,000 रुपये स्वयं की बचत से निवेश कर उन्होंने मुर्गी पालन का कार्य प्रारंभ किया। वर्तमान में उनका यह उद्यम सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है तथा वे निरंतर आय अर्जित कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

यह आपूर्ति स्थानीय स्तर पर महिलाओं द्वारा संचालित आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देने एवं बाजार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। विशेष रूप से महिलाएं इस बात से बेहद उत्साहित एवं खुश हैं कि अब उन्हें अपने उत्पादों के लिए घर के नजदीक ही स्थायी बाजार उपलब्ध हो रहा है, जिससे उनकी आय बढ़ने के साथ-साथ आत्मविश्वास में भी निरंतर वृद्धि हो रही है।
विशेष बात यह है कि इतनी बड़ी मांग की आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु इंद्रा देवी ने अपने साथ-साथ अपने गांव की दो अन्य महिलाओं को भी इस कार्य से जोड़ा है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा मिला है। यह पहल अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है।

इसके अतिरिक्त अगले सप्ताह 14 वाहिनी मुख्यालय हेतु लगभग 600 किलोग्राम जीवित बकरियों की आपूर्ति भी प्रस्तावित है, जिसके लिए स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं वर्तमान में मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु पूरी तैयारी में जुटी हुई हैं। महिलाएं समूह आधारित आजीविका मॉडल के माध्यम से बड़े बाजारों से जुड़ते हुए अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं।
अपर सचिव ग्राम्य विकास विभाग (परियोजना निदेशक – उत्तराखंड ग्राम्य विकास समिति) सुश्री झरना कमठान महोदया एवं मुख्य विकास अधिकारी डॉ. दीपक सैनी के निरंतर मार्गदर्शन एवं सहयोग से इस प्रकार की आजीविका गतिविधियों को नई दिशा मिल रही है। ग्रामोत्थान परियोजना के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण एवं विपणन सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे महिलाएं आत्मविश्वास के साथ उद्यमिता की ओर अग्रसर हो रही हैं। 14 वाहिनी मुख्यालय को की गई यह आपूर्ति महिला समूहों की कार्यक्षमता, गुणवत्ता आधारित उत्पादन एवं सामूहिक प्रयासों का सफल उदाहरण है।

परियोजना से जुड़े अधिकारियों एवं स्थानीय समुदाय द्वारा इंद्रा देवी एवं मोस्टा बाबा स्वयं सहायता समूह की इस उपलब्धि की सराहना की गई तथा भविष्य में भी इस प्रकार की आजीविका गतिविधियों को और अधिक प्रोत्साहित करने की बात कही गई। मुख्य विकास अधिकारी डॉ. दीपक सैनी ने कहा, “ग्रामोत्थान परियोजना के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर ही बाजार एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। आज महिलाएं न केवल सफल उद्यमी बन रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ रही हैं। इंद्रा देवी एवं स्वयं सहायता समूह की यह उपलब्धि दर्शाती है कि सामूहिक प्रयास, सही मार्गदर्शन और बाजार उपलब्ध होने पर ग्रामीण महिलाएं बड़ी से बड़ी मांग की आपूर्ति करने में सक्षम हैं। आने वाले समय में इस प्रकार की गतिविधियों को और अधिक विस्तार दिया जाएगा, जिससे अधिकाधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें।”

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