Sunday, May 17, 2026
Uttarakhand

जिले की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर यूं ही नहीं आ रहा है जिलाधिकारी को गुस्सा। एनएचएम के जिला व ब्लाक कार्यक्रम अधिकारीयों का अग्रिम आदेश तक रोका वेतन

टनकपुर राजकीय चिकित्सालय प्राइवेट अस्पतालों का कथित एजेंट बनने से रोगियों को नहीं मिल रहा है सरकारी सुविधाएंओं का लाभ।

जिले की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर जिलाधिकारी मनीष कुमार का गुस्सा यूं ही नहीं उबाल पर आया है। सदा शांत मिजाज के जिलाधिकारी उस समय भड़क गए जब टनकपुर जैसे महत्वपूर्ण राजकीय चिकित्सालय में रोगियों के आने के बाद उन्हें प्राइवेट क्लीनिक की ओर भेजना, दवाएं होते हुए बाजार से मगाना, सीएमएस के बाल रोग विशेषज्ञ होने के बावजूद भी कभी एक बच्चे को हाथ न लगाना, यहां हड्डी संबंधी रोगियों को यह कहकर उसे प्राइवेट अस्पतालों में भेजना कि यहां कोई व्यवस्था नहीं है की बात कह कर उसे प्राइवेट अस्पताल में भेजने की घटनाओं ने जिला अधिकारी को झकझोर दिया है।

जिलाधिकारी ने अब लगातार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग पर अपना ध्यान केंद्रित कर दिया है तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एनएचएम के कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्होंने जिला व चारों ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर का अग्रिम आदेश तक वेतन रोकने के आदेश देने के साथ लोहाघाट के राजकीय चिकित्सालय की चिकित्सा प्रबंधन समिति से संबंधित वित्तीय अभिलेख तहसीलदार से सील करने का आदेश देने के बाद पूरे चिकित्सा विभाग में हड़कंप मच गया है।

लोहाघाट के तहसीलदार द्वारा सभी रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेकर अब उसमें जिलाधिकारी के आदेश पर जांच कराई जा रही है। जिलाधिकारी का मानना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत शासन द्वारा लोगों को सभी सुविधाएं दिए जाने के बावजूद भी केवल कागजी प्रगति दिखाई जा रही है जिसे देखते हुए उन्होंने एनएचएम के कार्यों को प्रभावी रूप देने एवं वित्तीय गड़बड़ियों को रोकने के लिए अपर जिला अधिकारी को प्रशासक नियुक्त किए जाने पर भी विचार किया जा रहा है। जिले में चार डिप्टी सीएमओ के स्थान पर भले ही दो पद खाली है लेकिन जो है उनका भी कर्मचारियों पर कोई नियंत्रण नहीं है।

उन्होंने जन औषधि केंद्रों का पूरा उपयोग किया जाने, हर व्यक्ति का आयुष्मान कार्ड बनाने, अस्पताल में प्रसव कराने पर नगर की प्रसूता को ₹1000 तथा ग्रामीण प्रसूता को ₹1400 देने की व्यवस्था है जिलाधिकारी ने इस बात पर गंभीर चिंता जताई है कि चिकित्सकों द्वारा विभिन्न मदों से दवाओं की खरीद दिखाए जाने के बावजूद भी रोगियों को बाजार से दवाई लाने के लिए विवश किया जा रहा है डीएम के कड़े रूख से जिले के स्वस्थ व चिकित्सा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। सीएमओ देवेश चौहान ने बताया कि अब जिले के प्रत्येक चिकित्सालय में यदि रोगी को बाहर से दवाई लाने के लिए कहा जाता है तो संबंधित व्यक्ति फोन से उन्हें जानकारी दे सकता है। इस आशय का बोर्ड सभी चिकित्सालय में लगाए जाएंगे तथा जिलाधिकारी के आदेशों का कड़ाई से अनुपालन कराया जाएगा।



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