Saturday, August 22, 2026

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बिहार के मुंगेर में 14.5 किलोमीटर लंबे रेल-सह-सड़क-पुल का उद्घाटन

केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 696 करोड़ रुपये की लागत से बिहार के मुंगेर में राष्ट्रीय

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टीएमयू में ए रोडमैप फ्रॉम कैंपस टु कॉर्पोरेट पर सघन ट्रेनिंग

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के एफओईसीएस में तीन दिनी ऑनलाइन एम्प्लॉयबिलिटी इन्हैंस्मेंट प्रोग्राम-ईईपी का समापन पंजाब के डब्ल्यूआईसीसीआई की प्रेसिडेंट एंव

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Braking News – हरियाणा के गुरूग्राम की 22 मंजिला इमारत में बड़ा हादसा : छत गिरने से 2 की मौत कई परिवार फंसे

गुरुग्राम के चिंटेल पारादीसो हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में 22 मंज़िला इमारत की छठी मंज़िल की छत का एक हिस्सा गिरने के

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उत्तराखण्ड के पुलिसकर्मियों को मिलेगा प्रधानमंत्री जीवन रक्षा पुलिस पदक

ड्यूटी के दौरान अदम्य साहस दिखाने और अपनी जान पर खेलकर 06 जिंदगियाँ बचाने के लिए उत्तराखण्ड पुलिस के कांस्टेबल

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अटल टनल को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वाराअधिकारिक रूप से मिली ‘10,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग’ के रूप में मान्यता

नई दिल्ली में आयोजित एक ऐतिहासिक समारोह के दौरान, अटल टनल को आधिकारिक तौर पर वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा ‘10,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग’ के रूप में मान्यता दी गई है। सीमा सड़क संगठन के महानिदेशक (डीजीबीआर) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव चौधरी ने मनाली को लाहौल-स्पीति घाटी से जोड़ने वाली इस उत्कृष्ट  इंजीनियरिंग के निर्माण में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की शानदार उपलब्धि के लिए पुरस्कार प्राप्त किया। वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स यूके, एक ऐसा संगठन है जो मान्यता प्राप्त प्रमाणीकरण के साथ दुनिया भर में असाधारण रिकार्ड्स को सूचीबद्ध तथा सत्यापित करता है। दूरदर्शी परियोजना और राष्ट्र का गौरव अटल टनल 03 अक्टूबर 2020 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राष्ट्र को समर्पित की गई थी।रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण 9.02 किलोमीटर लंबी अटल टनल ‘रोहतांग दर्रे’ से गुजरती है, इसका निर्माण मनाली-लेह राजमार्ग पर अत्यंत कठिन इलाके में ठंड के तापमान की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में किया गया था। इस सुरंग के निर्माण से पहले तक, यह राजमार्ग लाहौल और स्पीति को मुख्य भूमि से अलग करते हुए सर्दियों के मौसम में छह महीने तक बंद रहा करता था। अटल टनल के निर्माण से मनाली-सरचू सड़क पर 46 किलोमीटर की दूरी और यात्रा के समय में चार से पांच घंटे तक की कमी आई है, जिससे मनाली-लेह राजमार्ग पर सभी मौसमों में कनेक्टिविटी उपलब्ध हो गई है। हिमालय के पीर पंजाल पर्वतमाला में तैयार की गई इस सुरंग का निर्माण तकनीकी और इंजीनियरिंग कौशल की उतनी ही कठिन परीक्षा है, जितनी मानव सहनशक्ति और मशीनी प्रभावकारिता की। इसका निर्माण अत्यंत कठोर एवं चुनौतीपूर्ण इलाके में किया गया है, जहां सर्दियों में तापमान शून्य से 25 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है

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