Tuesday, May 12, 2026
Uttarakhand

क्रॉप कटिंग के आंकड़ों से तय होती हैं कृषि योजनाएं और फसल बीमा दावे: डीएम »

जिलाधिकारी अंशुल की मौजूदगी में सोमवार को हवालबाग स्थित लाइन स्टेट फार्म में गेहूं की फसल की क्रॉप कटिंग की गई। इस दौरान जिलाधिकारी ने स्वयं खेत में जाकर फसल कटाई की और किसानों से संवाद कर उनकी समस्याओं व सुझावों की जानकारी ली। जिलाधिकारी ने बताया कि विभिन्न फसलों की क्रॉप कटिंग का प्रयोग राजस्व विभाग और कृषि सांख्यिकी विभाग संयुक्त रूप से करते हैं। इन प्रयोगों से प्राप्त उत्पादन आंकड़ों का उपयोग फसल उत्पादन का अनुमान लगाने, उत्पादकता की गणना करने और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा दावों के भुगतान में किया जाता है। उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों के आधार पर सरकार और संबंधित संस्थाएं किसानों के लिए योजनाएं और नीतियां तैयार करती हैं।

क्रॉप कटिंग प्रयोग के तहत चयनित खेतों में 5×6 मीटर के दो प्रयोगात्मक प्लॉट बनाए गए। इन प्लॉटों में गेहूं की फसल काटकर बालियां एकत्र की गईं। प्रथम प्लॉट में 12.4 किलोग्राम तथा दूसरे प्लॉट में 13 किलोग्राम गेहूं की बालियां प्राप्त हुईं। जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद में ऐसी फसलों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है जो स्थानीय जलवायु के अनुकूल होने के साथ जंगली जानवरों से भी सुरक्षित रहें। उन्होंने विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के अधिकारियों को इस संबंध में व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

साथ ही संबंधित विभागीय अधिकारियों से किसानों को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप खेती के लिए प्रोत्साहित करने को कहा। उन्होंने कहा कि किसानों को बागवानी, बेमौसमी सब्जियों और औषधीय फसलों की खेती के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए, जिससे उन्हें बेहतर लाभ मिल सके। परंपरागत कृषि पद्धतियों के बजाय आधुनिक तकनीक आधारित खेती को अधिक लाभकारी बताते हुए उन्होंने किसानों को नई तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया। इस मौके पर अपर सांख्यिकी अधिकारी अशोक कुमार, तहसीलदार सदर रवि शाह, विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के कृषि विशेषज्ञ समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।



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