राज्य आंदोलनकारी और शिक्षा मंदिर तरुण हिमालय के पूर्व प्रबंधक आनंदमणि नौटियाल पंचतत्व में विलीन
हरिद्वार। राज्य आंदोलनकारी और शिक्षा मंदिर तरुण हिमालय कॉलेज के पूर्व प्रबंधक, वरिष्ठ समाजसेवी और उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अग्रणी नेता आनंदमणि नौटियाल जी का आज खड़खड़ी श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। उनके पुत्र सीतांशु नौटियाल ने चिता को मुखाने दी इस अवसर पर कई राजा आंदोलनकारी मौजूद रहे । गत दिवस न्यू हरिद्वार स्थित आवास पर उनका 79 वर्ष की उम्र मे उनका असामयिक निधन हो गया था।
जिसके बाद तरुण हिमालय संस्था परिवार और पूरे क्षेत्र में शोक की गहरी लहर दौड़ गई है। वह अपने पीछे दो पुत्रों और एक पुत्री का भरा-पुरा परिवार छोड़ गए हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में अपूर्णीय क्षति
आनंदमणि नौटियाल जी ने तरुण हिमालय संस्था और विद्यालय के प्रबंधक के रूप में लंबे समय तक अपनी सेवाएं दीं। क्षेत्र में शिक्षा के प्रचार-प्रसार और समाज के हर वर्ग तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने में उनका योगदान अतुलनीय था। संस्था को सींचने और बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए वे सदैव तत्पर रहते थे। विद्यालय परिवार ने उन्हें एक अत्यंत कठिन परिश्रमी, ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ मार्गदर्शक के रूप में याद किया।
राज्य आंदोलन में निभाई मुख्य भूमिका
नौटियाल जी केवल शिक्षाविद् ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन के एक सक्रिय और प्रमुख सिपाही भी थे। अलग राज्य की मांग को लेकर हुए संघर्षों में उन्होंने अग्रिम पंक्ति में रहकर नेतृत्व किया था। उनके विचार और राज्य के प्रति उनका समर्पण आज की युवा पीढ़ी के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत रहेगा।
विद्यालय में शोक सभा और श्रद्धांजलि
उनके निधन का दुखद समाचार मिलते ही तरुण हिमालय इंटर कॉलेज में एक आकस्मिक शोक सभा का आयोजन किया गया। प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में आयोजित इस सभा में विद्यालय के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। उपस्थित भावुक कर्मचारियों ने उन्हें याद करते हुए अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके सम्मान में विद्यालय में शेष दिन के लिए अवकाश घोषित कर दिया गया।
तरुण हिमालय संस्था परिवार का कहना है कि आनंदमणि जी का जाना एक युग का अंत है। उन्होंने संस्था को जो वैचारिक मजबूती और ईमानदारी की नींव दी, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

