Wednesday, October 7, 2026
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पहाड़ी व्यंजनों की खुशबू से सराबोर रहा शिक्षा मंदिर तरुण हिमालय

हरिद्वार। शिक्षा मंदिर तरूण हिमालय इंटर कालेज में उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक-संस्कृति, खानपान और लोक-भाषाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘गढ़भोज दिवस’ का भव्य एवं उत्साहपूर्ण आयोजन किया गया। इस अवसर पर पूरा प्रांगण सांस्कृतिक कार्यक्रमों , उत्तराखण्ड की पारंपरिक छटा और सुवासित पहाड़ी व्यंजनों की खुशबू से सराबोर रहा।

समारोह की शुरुआत विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों से हुई, जिसमें उत्तराखण्ड की अमूल्य लोक-संस्कृति के विभिन्न रंग देखने को मिले। छात्र-छात्राओं ने गढ़वाली और कुमाउँनी लोक-भाषाओं में ओजस्वी भाषण दिए तथा देवभूमि के पौष्टिक एवं पारंपरिक मोटे अनाजों (श्री अन्न) की उपयोगिता पर आधारित सुंदर नाटक व सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। छात्र-छात्राओं ने अपनी भाषा और जड़ों से जुड़ने का सुंदर संदेश दिया।

गढ़भोज का मुख्य आकर्षण उत्तराखण्ड के सुप्रसिद्ध एवं पारंपरिक व्यंजन रहे। विद्यालय की रसोई में स्थानीय स्वाद से परिपूर्ण झंगोरे की खीर, फांडू, काफली, गर्मा-गर्म पूरियां और मंडवे (रागी) की रोटियां तैयार की गईं। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, विद्यालय के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने एक साथ बैठकर पारंपरिक सामूहिक गढ़भोज का आनंद लिया। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रतिभाग करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित स्थानीय पार्षद निशा नौडियाल ने विद्यालय के प्रयास की सराहना करते हुए कहा, “हमारी लोक-संस्कृति, भाषा और खानपान ही हमारी असली पहचान हैं। आज के आधुनिक दौर में जब नई पीढ़ी अपनी जड़ों से दूर हो रही है, तब गढ़भोज जैसे आयोजन बच्चों को अपनी माटी, परंपराओं और मोटे अनाजों के स्वास्थ्य लाभों से जोड़ने का सराहनीय काम करते हैं। हमें अपनी बोली-भाषा और खानपान पर गर्व होना चाहिए।”

विद्यालय के प्रधानाचार्य त्रिलोक चन्द्र भट्ट ने सभी अतिथियों और समस्त शिक्षक वर्ग का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “उत्तराखण्ड का खानपान केवल भोजन नहीं, बल्कि हमारी पौराणिकता, स्वास्थ्य और प्राकृतिक जीवनशैली का प्रतीक है। गढ़भोज दिवस मनाने का मुख्य ध्येय विद्यार्थियों में गढ़वाली-कुमाउँनी भाषा के प्रति अनुराग जगाना और हमारे पारंपरिक अनाजों—जैसे मंडवा, झंगोरा—की उपयोगिता से उन्हें परिचित कराना है। विद्यालय भविष्य में भी लोक-संस्कृति के संवर्धन के लिए ऐसे प्रयास जारी रखेगा।”

कार्यक्रम में विद्यालय का समस्त शिक्षक वर्ग, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उत्साहपूर्वक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल एवं सफल संचालन आशीष गोदियाल द्वारा किया गया।

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