उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय का द्वादश दीक्षान्त समारोह सम्पन्न, राज्यपाल ने मेधावियों को किया सम्मानित
हरिद्वार। उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय का द्वादश दीक्षान्त समारोह शनिवार को भाद्रपद पूर्णिमा के पावन पर्व पर अत्यंत भव्य, पारम्परिक और गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। समारोह का आयोजन उत्तराखण्ड संस्कृत संस्थानम् के सभागार में किया गया। दीक्षान्त समारोह का शुभारम्भ वन्देमातरम् और राष्ट्रगान के साथ हुआ और उसी गरिमा के साथ इसका समापन भी राष्ट्रगान से हुआ।
समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं उत्तराखण्ड के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) PVSM, UYSM, AVSM, VSM ने की। कुलाधिपति द्वारा दीक्षान्त समारोह के विधिवत शुभारम्भ की औपचारिक घोषणा के उपरान्त भगवान विश्वनाथ की वैदिक स्तुति के साथ कार्यक्रम का मंगलारम्भ हुआ।
कुलपति प्रोफेसर रमाकांत पांडे ने ‘अतिथि देवो भव ‘ की सनातन परम्परा का निर्वहन करते हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने विश्वविद्यालय की वार्षिक प्रगति, शोध गतिविधियों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत संस्कृत के प्रचार-प्रसार की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने माननीय राज्यपाल के गौरवमयी सैन्य जीवन और राष्ट्र सेवा का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय उनके अनुभव और मार्गदर्शन में निरन्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।
समारोह के मुख्य चरण में शैक्षणिक उत्कृष्टता का सम्मान किया गया। साहित्य, व्याकरण, वेद, ज्योतिष, दर्शन और योग विज्ञान में शोध पूर्ण करने वाले *6 शोधार्थियों को विद्या-वारिधि (पी.एच.डी.)* की उपाधि माननीय राज्यपाल के कर-कमलों से प्रदान की गई।
शास्त्री, आचार्य और अन्य परीक्षाओं में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले *32 मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक* प्रदान कर सम्मानित किया गया। स्वर्ण पदक प्राप्त करते समय छात्रों के चेहरों पर गर्व और हर्ष का अलौकिक भाव देखने योग्य था। इस अवसर पर सैकड़ों छात्रों को उपाधि भी प्रदान की गई।
ज्ञान परम्परा को समृद्ध करने वाले कई ग्रंथों का लोकार्पण भी इस अवसर पर किया गया। कुलपति प्रो. रमाकांत पांडे द्वारा रचित तीन मौलिक पुस्तकों का विमोचन माननीय राज्यपाल ने किया। पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए अतिथियों को शॉल के साथ तुलसी का पौधा भेंट किया गया।
समारोह में श्री लाल बहादुर शास्त्री केन्द्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति *प्रोफेसर रमेश कुमार पांडेय को* उनके संस्कृत साहित्य में अप्रतिम योगदान के लिए *’महामहोपाध्याय’* के सर्वोच्च सम्मान से राज्यपाल द्वारा अलंकृत किया गया। वरिष्ठ लोक कलाकार, साहित्यकार एवं प्रसिद्ध लोक गायिका *पद्मश्री डॉ. माधुरी बड़थ्वाल जी को ‘कलाश्री’* के सम्मान से सम्मानित किया गया। संस्कृत के वरिष्ठ विद्वान डॉ. अनुसूया प्रसाद पन्त को उनकी अस्वस्थता के कारण ‘विद्यावाचस्पति’ की मानद उपाधि उनके पुत्र द्वारा प्राप्त की गयी। जयपुर के प्रख्यात संस्कृत विद्वान *प्रोफेसर रामकुमार शर्मा जी को भी ‘विद्यावाचस्पति’* की मानद उपाधि राज्यपाल के हाथों प्रदान की गई।
विशिष्ट अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री *डॉ. धन सिंह रावत* ने कहा कि वर्ष 2017 से चलाए गए अभियानों और 25 हजार स्वयंसेवकों के समर्पण से उत्तराखण्ड वर्ष 2025 तक पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है। उन्होंने कहा कि 2017 में प्रदेश में 24 हजार टीबी मरीज थे, जो प्रभावी नीतियों से मात्र तीन वर्षों में टीबी मुक्त हो गया। अब सरकार का लक्ष्य ‘नशा मुक्त उत्तराखण्ड’ बनाना है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि वह संस्कृत के लिए दिल खोलकर संसाधन उपलब्ध कराएंगे।
आधार भाषण में प्राग्ज्योतिषपुर विश्वविद्यालय, गुवाहाटी के कुलपति *प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी* ने कहा कि NEP-2020 के क्रियान्वयन में संस्कृत को विद्यालय से विश्वविद्यालय तक अग्रणी भूमिका निभानी होगी। मुगल काल से पूर्व विश्व जीडीपी में भारत का योगदान 35% था, जो ब्रिटिश काल के बाद 2-3% रह गया, इसका मुख्य कारण हमारी कौशलयुक्त शिक्षा का क्षरण था। अमृत काल में 62% युवा जनसंख्या को संस्कृत और कौशल से जोड़ना समय की मांग है।
आशीर्वचन में श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली के पूर्व कुलपति *प्रो. रमेश कुमार पांडे* ने कहा कि संस्कृत को AI और मशीन अनुवाद से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुँचाना होगा और ‘जयतु भारतम्, जयतु संस्कृतम्’ के उद्घोष के साथ अपना उद्बोधन समाप्त किया।
इस अवसर पर संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रतिभा मेहरा लूथरा, पूर्व कुलपति प्रो. रूप किशोर शास्त्री, पूर्व कुलपति डॉ. सुधा रानी पांडे, लोक सेवा आयोग उत्तराखण्ड के अध्यक्ष, संस्कृत संस्थानम् के सचिव प्रो. विनय विद्यालंकार सहित कार्यपरिषद सदस्य, प्राध्यापकगण, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

