परमार्थ निकेतन में राष्ट्रीय महिला आयोग एवं उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष का दर्शनार्थ आगमन
परमार्थ निकेतन में राष्ट्रीय महिला आयोग एवं उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष का दर्शनार्थ आगमन
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में विश्व विख्यात गंगा आरती में किया सहभाग
नारी शक्ति, शिक्षा, स्वास्थ्य, सम्मान एवं महिला सशक्तिकरण के विभिन्न आयामों पर हुआ विशद संवाद
लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि एवं शत्-शत् नमन
’’ऋषिकेश, 31 अक्टूबर।’’ परमार्थ निकेतन में राष्ट्रीय महिला आयोग की माननीय अध्यक्ष श्रीमती विजया के. रहाटकर जी एवं उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की माननीय अध्यक्ष श्रीमती कुसुम कंडवाल जी का दर्शनार्थ आगमन हुआ। इस अवसर पर उन्होंने परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी तथा पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य एवं आशीर्वाद से विश्व विख्यात गंगा आरती में सहभाग किया।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में माँ गंगा के पावन तट पर आध्यात्मिकता, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रचेतना के दिव्य वातावरण में दोनों माननीय अध्यक्षों ने माँ गंगा का पूजन एवं आरती कर देश की सुख-समृद्धि, नारी सम्मान, सामाजिक समरसता और जनकल्याण हेतु मंगलकामना की।
इस अवसर पर नारी शक्ति के सम्मान, महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, आत्मनिर्भरता, सामाजिक सहभागिता तथा महिला सशक्तिकरण के विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विशद एवं सार्थक संवाद किया।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि ’’नारी केवल परिवार की आधारशिला ही नहीं, बल्कि संस्कार, संस्कृति, सृजन और समाज की चेतना का मूल स्रोत है। नारी का सम्मान केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का जीवनमूल्य है।’’ जिस समाज में नारी सुरक्षित, शिक्षित, स्वस्थ, स्वाभिमानी और आत्मनिर्भर होती है, वही समाज वास्तविक अर्थों में समृद्ध और विकसित होता है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति में नारी को शक्ति, प्रकृति, सृजन और चेतना के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। हमारे यहाँ माँ सरस्वती ज्ञान की, माँ लक्ष्मी समृद्धि की और माँ दुर्गा शक्ति एवं साहस की प्रतीक हैं। यह केवल देवी उपासना की परंपरा नहीं, बल्कि नारी के भीतर विद्यमान सामर्थ्य, गरिमा और असीम संभावनाओं को स्वीकार करने वाली जीवनदृष्टि है। आवश्यकता है कि यह दृष्टि हमारे व्यवहार, परिवार, शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक संस्थाओं और नीतियों में भी प्रतिबिंबित हो।
उन्होंने कहा कि नारी सशक्तिकरण से तात्पर्य महिलाओं को अवसर उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ऐसा वातावरण निर्मित करना है जहाँ वे निर्भय होकर अपने सपनों को साकार कर सकें। प्रत्येक बालिका को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रत्येक महिला को सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएँ, सुरक्षित वातावरण, आर्थिक आत्मनिर्भरता और अपने निर्णय स्वयं लेने का अधिकार मिलना चाहिए। जब एक महिला शिक्षित होती है, तो एक परिवार शिक्षित होता है; जब वह स्वस्थ होती है, तो आने वाली पीढ़ियाँ स्वस्थ होती हैं और जब वह आत्मनिर्भर होती है, तो समाज की अर्थव्यवस्था एवं चेतना दोनों सशक्त होती हैं।
पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि महिला सशक्तिकरण की यात्रा महिलाओं को केवल अधिकार देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें अपनी आंतरिक शक्ति, आत्मविश्वास, क्षमता और नेतृत्व को पहचानने के लिए प्रेरित करना भी आवश्यक है। शिक्षा, स्वास्थ्य, मानसिक सशक्तता, आर्थिक स्वतंत्रता और आध्यात्मिक चेतना महिलाओं के सर्वांगीण विकास के महत्वपूर्ण आधार हैं। महिलाओं को अवसरों के साथ-साथ ऐसा सहयोगी और सम्मानपूर्ण वातावरण मिलना चाहिए, जिसमें वे अपनी प्रतिभा का पूर्ण विकास कर सकें।

उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि बालिकाओं की शिक्षा के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य, पोषण, आत्मरक्षा, डिजिटल साक्षरता और जीवन कौशल पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।
राष्ट्रीय महिला आयोग की माननीय अध्यक्ष श्रीमती विजया के. रहाटकर जी एवं उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की माननीय अध्यक्ष श्रीमती कुसुम कंडवाल जी ने परमार्थ निकेतन की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, पर्यावरण संरक्षण एवं समाजसेवा से जुड़ी गतिविधियों की सराहना की। उन्होंने पूज्य स्वामी जी एवं पूज्य साध्वी जी के साथ महिला कल्याण, सामाजिक जागरूकता, महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में जनभागीदारी बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
परमार्थ निकेतन की विश्व विख्यात गंगा आरती में सहभाग का यह अवसर आध्यात्मिक अनुभूति के साथ नारी गरिमा, सामाजिक चेतना और राष्ट्र निर्माण के संकल्पों को भी समर्पित रहा।
पूज्य स्वामी जी ने राष्ट्रीय महिला आयोग की माननीय अध्यक्ष श्रीमती विजया के. रहाटकर जी एवं उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की माननीय अध्यक्ष श्रीमती कुसुम कंडवाल जी को हिमालय की हरित भेंट रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आधुनिक भारत के शिल्पकार, राष्ट्रीय एकता और अखंडता के प्रतीक, लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी का जीवन राष्ट्र की सुरक्षा, सांस्कृतिक जागरण और हर वर्ग के कल्याण के प्रति समर्पण की अनुपम मिसाल है।
सरदार पटेल जी ने अपने अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प और दूरदर्शिता से रियासतों में बँटे देश को एक सूत्र में पिरोकर सशक्त एवं अखंड भारत की नींव रखी। अखिल भारतीय सेवाओं की आधारशिला रखकर देश की प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ आधार प्रदान किया। खेड़ा और बारडोली सत्याग्रह के माध्यम से किसानों के अधिकारों के लिए उनका संघर्ष जनसेवा, नेतृत्व और जनशक्ति के प्रति अटूट विश्वास का अनुपम उदाहरण है।
राष्ट्रहित को सर्वाेपरि रखने वाले सरदार पटेल जी का त्याग, समर्पण और राष्ट्रप्रेम युगों-युगों तक प्रत्येक देशवासी को एक भारत, श्रेष्ठ भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करता रहेगा।
